Wednesday, May 16, 2007

सुस्वागतम्

कुछ अपने बारे में!
जीवन में चारों ओर इतनी ईर्ष्या, द्वेष, अनाचार की अगन देखकर अपने लिये ज्वाला के अलावा कोई और नाम नहीं सूझा!
यह प्रज्ज्वला बुराई को जलाने में प्रयत्नशील रहेगी, मगर एक व्यक्ति कितना कुछ कर सकता है?!!!
यदि अपने चारों ओर की घटनाओं पर ही गौर करके उन्हें उजागर किया जाए, तो भी शायद बहुत बड़ी बात होगी।
मेरे साथ कौन आएगा बुराई के ख़िलाफ संघर्ष में, या कि अपना रास्ता मुझे अकेले ही चलना होगा?

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